
Mutual Consent Divorce के बारे में जानें ⚖️ आसान भाषा में |
भारत में Mutual Consent Divorce का मतलब है कि पति और पत्नी दोनों मिलकर शांति से अलग होने का फैसला करते हैं, बिना किसी विवाद के।
यह प्रक्रिया मुख्य रूप से Hindu Marriage Act, 1955 की धारा 13B के तहत होती है (हिंदुओं के लिए)।
🔹 Mutual Consent Divorce की मुख्य शर्तें
दोनों की सहमति जरूरी
पति और पत्नी दोनों तलाक के लिए तैयार हों।
अलग रहना (Separation)
कम से कम 1 साल से दोनों अलग रह रहे हों।
मतभेद खत्म करना संभव न हो
यानी रिश्ता सुधारने की संभावना न हो।
🔹 Divorce Process (प्रक्रिया)
First Motion (पहली याचिका)
दोनों कोर्ट में मिलकर आवेदन देते हैं।
Cooling-Off Period (6 महीने का समय)
कोर्ट 6 महीने का समय देता है ताकि दोनों सोच सकें।
(कुछ मामलों में यह समय कम भी हो सकता है)
Second Motion (दूसरी सुनवाई)
6 महीने बाद दोनों फिर कोर्ट में उपस्थित होते हैं।
Final Decree (अंतिम आदेश)
कोर्ट तलाक को मंजूरी दे देता है।
🔹 Important Points
💰 Alimony (भरण-पोषण) – पहले से तय कर लिया जाता है
👶 Child Custody (बच्चों की जिम्मेदारी) – आपसी सहमति से तय
⚖️ Property & Assets – आपस में बाँट लिए जाते हैं
🔹 Mutual Consent Divorce के फायदे
✔️ कम समय में पूरा हो जाता है
✔️ कम खर्च
✔️ मानसिक तनाव कम
✔️ कोर्ट में लंबी लड़ाई नहीं
🔹 कब Mutual Divorce सही विकल्प है?
अगर दोनों के बीच रिश्ते को बचाना संभव नहीं है और आपसी सहमति है, तो यह सबसे सम्मानजनक और शांतिपूर्ण तरीका है।
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