
UP में FIR को लेकर बड़ा बदलाव | अब 31 मामलों में सीधे FIR नहीं होगी !!
उत्तर प्रदेश में मार्च 2026 में DGP राजीव कृष्ण द्वारा जारी सर्कुलर (संख्या 18/2026) के बाद FIR दर्ज करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। यह फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच के आदेश (अनुरुद्ध प्रसाद उर्फ अनुरुद्ध तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, प्रार्थना पत्र संख्या 596/2026, दिनांक 25 फरवरी 2026) के अनुपालन में लिया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जिन मामलों में कानून के अनुसार केवल मजिस्ट्रेट ही संज्ञान ले सकता है, उनमें पुलिस द्वारा सीधे FIR दर्ज करना अवैध है। इसे “प्रक्रिया का उल्लंघन” और “Police Overreach” माना गया।
*अब नया नियम क्या कहता है?
कुछ मामलों में FIR सीधे थाने में दर्ज नहीं होगी। पीड़ित को पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद (Complaint) दाखिल करना होगा या संबंधित विभाग में शिकायत करनी होगी। FIR तभी दर्ज होगी जब मजिस्ट्रेट आदेश देगा।
किन मामलों में लागू होगा?
इन 31 श्रेणियों में प्रमुख रूप से शामिल हैं-
दहेज प्रताड़ना (498A), घरेलू हिंसा, कार्यस्थल यौन उत्पीड़न, चेक
बाउंस (NI Act), उपभोक्ता विवाद, ट्रेडमार्क उल्लंघन, मानहानि, खाद्य मिलावट, वायु/जल प्रदूषण, खनन कानून, पशु क्रूरता, बाल श्रम, मानव अंग तस्करी आदि।
इन सभी में common rule: पहले Complaint, फिर FIR.
कोर्ट की मुख्य आपत्तिः
पुलिस Complaint आधारित मामलों में भी FIR दर्ज कर रही थी, कई बार गलत धाराएं लगा रही थी, जिससे केस कोर्ट में टिक नहीं रहे थे और आरोपियों को कानूनी फायदा मिल रहा था।
बरेली केस में भी कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया, जहां रेप के आरोप के बावजूद FIR में हल्की धाराएं लगाई गईं, जिसे “गंभीर लापरवाही” माना गया।
इस फैसले का असर:
फर्जी FIR पर लगाम लगेगी
जांच प्रक्रिया मजबूत होगी
! लेकिन कोर्ट पर बोझ बढ़ सकता है
! आम नागरिकों को प्रक्रिया लंबी लग सकती है
! ध्यान रखें: हत्या, बलात्कार, डकैती, चोरी जैसे गंभीर अपराधों में FIR पहले की तरह तुरंत दर्ज होगी।
निष्कर्षः
यह कोई नया कानून नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद प्रावधानों को सख्ती से लागू किया गया है ताकि न्यायिक प्रक्रिया सही तरीके से चले।
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